पौराणिक ग्रन्थों और धर्म शास्त्रों में उत्तराखण्ड के कितने नाम हैं ?

 


      पौराणिक ग्रन्थों और धर्म शास्त्रों में उत्तराखण्ड के कितने नाम  हैं ?








 उत्तराखंड को धर्म शास्त्रों और पौराणिक ग्रंथों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तराखंड, भारतीय पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिकता में गहराई से निहित एक क्षेत्र है,।  इस राज्य  का उल्लेख अनेक धार्मिक ग्रंथों और महाकाव्यों में मिलता है। इनमें से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं।

1. देवभूमि







उत्तराखंड को मुख्य रूप से "देवभूमि" के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है "देवताओं की भूमि"। क्योंकि यह कई हिंदू देवताओं और इसके कई मंदिरों से जुड़ा हुआ है, जिसमें पवित्र चार धाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) शामिल हैं। यह नाम इस क्षेत्र के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है। 

2.केदारखंड










केदारखंड  उत्तराखंड के ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ में एक महत्वपूर्ण नाम है। इसे विशेष रूप से पौराणिक ग्रंथों और धार्मिक संस्कृतियों में उल्लेखित किया गया है। केदारनाथ केदारखंड का सबसे महत्वपूर्ण स्थल केदारनाथ है, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। केदारनाथ का मंदिर एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं।

केदारखंड मुख्य रूप से केदारनाथ के आसपास के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। केदारखंड क्षेत्र का उल्लेख *स्कंद पुराण* जैसे हिंदू ग्रंथों में किया गया है। यह विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्र को संदर्भित करता है।

3.मानसखंड


 मानसखंड उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र को "मानसखंड" के नाम से जाना जाता है। इस नाम का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है, और यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मानसखंड का एक प्रमुख धार्मिक स्थल मानस कुंड है। यहां के धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, यह कुण्ड पांडवों द्वारा बनाया गया था और इसे एक पवित्र स्थान माना जाता है। मानसखंड हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित उत्तराखंड के एक क्षेत्र का एक और प्राचीन नाम है, जो मानसरोवर और कैलाश झील के आसपास के क्षेत्र को संदर्भित करता है, हालांकि भौगोलिक रूप से यह उत्तराखंड से आगे तिब्बत तक फैला हुआ है।
मानसखंड का अत्यधिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, विशेषकर उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में। इसका वर्णन प्राचीन हिंदू धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण में मिलता है, जहां मनसखण्ड को पवित्र भूमि के रूप में महिमामंडित किया गया है।

वैदिक भूमि  

प्राचीन वेदों के अनुसार, उत्तराखंड को वैदिक भूमि के रूप में भी जाना जाता था, जो इस क्षेत्र की वैदिक महत्वता को दर्शाता है।

मध्यदेश

प्राचीन ग्रंथों में उत्तराखंड को मध्यदेश के रूप में भी उल्लेखित किया गया है, जो इस क्षेत्र के केंद्रीय स्थान को दर्शाता है।

अथर्ववेदिका

अथर्ववेद के अनुसार, उत्तराखंड को अथर्ववेदिका के रूप में भी जाना जाता था।

सप्तर्षि क्षेत्र

 उत्तराखंड को सप्तर्षि क्षेत्र भी कहा जाता है, जहाँ सात ऋषियों ने तपस्या की थी। यह नाम प्राचीन हिन्दू ग्रंथों में विशेष रूप से उल्लेखित है।

वृहस्पति क्षेत्र

कुछ पुरानी धार्मिक मान्यताओं में उत्तराखंड को वृहस्पति क्षेत्र भी कहा जाता था, जो कि वृहस्पति गुरु के साथ जुड़ा हुआ है।

संग्रामवती

प्राचीन ग्रंथों में उत्तराखंड को संग्रामवती नाम से भी पुकारा गया है। यह नाम क्षेत्र की ऐतिहासिक घटनाओं और संघर्षों को दर्शाता है।

                                       धन्यवाद 

                               A.K.Gudiyal.Uttarakhandi


Uttarakhand Gyan

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