उत्तराखंड के लोकदेवताओं का प्रजातीय वर्गीकरण

 


      उत्तराखंड लोकदेवताओं का प्रजातीय वर्गीकरण 


उत्तराखंड के लोकदेवताओं का प्रजातीय वर्गीकरण 


मानव संसार की तरह ही उत्तराखंड के दैवी संसार में भी जाति , वर्ग एवं श्रेणी अनुसार  भिन्नता  पायी जाती है।  इनमें से कुछ  पौराणिक देवी-देवताओं से सम्बद्ध पाये जाते हैं तो कुछ मानवीय वर्ग ,और कुछ  सिद्ध-सन्त वर्गों के साथ। कुछ देव प्रवृति के  हैं तो कुछ अर्ध देव प्रकृति के तथा कुछ भूत-प्रेत प्रकृति के । इसके अतिरिक्त अनेक देवी-देवता ऐसे भी होते हैं जिनका सम्बन्ध असुर, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व आदि वर्गों में  पाया जाता है। इन सबका पूर्ण विवरण तो यहां दे पाना तो कठिन है, किन्तु फिर भी मोटे मोटे तौर पर इन विभिन्न वर्गों से सम्बद्ध देवी-देवताओं का संक्षेप में  विवरण निम्न रूपों में पाया जाता है। दोनों मण्डलों के हिसाब से इनकी स्थिति निम्न रूपों में पायी जाती है।

देव योनि से सम्बंधित देवता

यों तो देव योनियों  से सम्बंधित देवशक्तियों के अपने कई वर्ग भेद हैं। किन्तु पिछले समय  विभिन्न नाम एवम अलग अलग रूपों में विभिन्न आस्थाओं पर पूजे जाने वाले पौराणिक देवी-देवताओं के अतिरिक्त जो एक अन्य देवशक्ति, जिसकी पूजा आराधना का उत्तराखंड लोकजीवन में नाग देवता वर्ग का विशेष महत्त्व होता है। दोनों मंडलों में विभिन्न स्थानों पर पूजे जाने वाले  नाग देवताओं का विवरण  क्रमशः इस प्रकार से माना जाता है।

नाग योनि से सम्बन्धित देवता

नाग कोटि के देवताओं की स्थिति इस प्रकार पायी जाती है। गढ़वाल मंडल भगवान् कृष्ण के रूप में पूजे जाने वाले नागर्जा या नागराजा केवल सेम मुखीम जिले के अलावा कोई ऐसा जिला नहीं  है जहां पर नागदेवताओं को समर्पित मूर्ति , देवालय या प्रतीक रूप में उनकी पूजा न की जाती हो । वीरणेश्वर को समर्पित देवालयों, मवालस्यूं, चौथान पट्टी  के अतिरिक्त गढ़वाल मंडल में ज्यादातर  नाग देवताओं के देवस्थल मौजूद हैं। जैसे कि  शेषनाग , भीखल नाग , मंगलनाग , वनपुरनाग , लोहियानाग , पुष्करनाग , नागदेव , तक्षकनाग, वासुकी, वसीनाग, वसीनाग, बढ़वानाग आदि।

गढ़वाल मंडल के समान ही कुमाऊं मंडल में भी नागकुल के देवताओं को समर्पित अनेक देवस्थल हैं। वीरणेश्वर को समर्पित पांच ,छः देवालयों के अतिरिक्त बागेश्वर जनपद में ही बागेश्वर-थल मार्ग पर नागों को समर्पित अनेक देवालय हैं जिनमें  धौलीनाग, खरहीनाग, फेणीनाग, बेणीनाग , पिंगलनाग, धूमरीनाग, फिशनाग, सुन्दरनाग, कालीनाग, वासुकीनाग, शेषनाग, शिशुनाग, बिसुनाग, पुष्करनाग, तक्षकनाग, कार्केटकनाग, नागदेवता, नागनाथ, वासुकीनाग, नागदेव पदमगीर, सितेश्वरनाग, शेषनाग , हुंकारनाग, फुंकारनाग, अनन्तनाग, बिलानाग, आदि ।

उत्तराखण्ड के दोनों ही मंडलों में समान रूप से पूजे जाने वाले लोक देवताओं में विशेष रूप में नागदेवता, नाथसिद्ध, भैरव, क्षेत्रपाल, सिदुवा-विधुवा, नन्दा, जाख-जाखनी, ज्वाल्पा, झाली-माली, निरंकार, नरसिंह, घंटाकर्ण, और कुबेर । कुमाऊं में ज्यादातर पूजे जाने वाले कत्यूररों  एवं कलबिष्ट की पूजा गढ़वाल के कई क्षेत्रों में भी प्रचलित रहती आयी  है ,कुमाऊं के बहुमान्य लोकदेवता गोरखनाथ व गोरिल की पूजा का गढ़वाल में भी काफी महत्व  रहता आया है। 

अर्ध देव योनि से सम्बंधित देवता  

कुमाऊं मंडल में अर्ध देवयोनि से सम्बंधित देवशक्तियों में जिन्हें विशेष मान्यता प्राप्त रही है,जिनमे चौंसठ जोगनियां, बावन वीर, नथवाली, घूंघटवाली, अधिकारी, उजियारी, बाईस परियां, सोलह सौ आंछरियां, गढ़देवी आदि देवी देवताओं को अर्द्ध देव योनि से सम्बन्धित  देवशक्तियों के रूप में जाना जाता है।

भूत-प्रेत योनि से सम्बंधित देवता

 इस वर्ग से सम्बन्धित्त लोगों द्वारा पूजे जाने वाले  देवी देवताओं एवम परा शक्तियों में प्रमुख हैं- बारह भाई जटिया मसाण, सोलह सौ ऐड़ी, सात भाई चनणियां, दो भाई घनकाणियां, सोलह सौ बाण, खेंटू की बयाली, पिन्नू की भराड़ी । इनके साथ नौ कुबलिनें आदि देवी देवता प्रमुख हैं। इसके अलावा बेताल, लटिया मसाण, खबीस आदि  देवताओं को भी इसी वर्ग में रखा  गया है।  जिनमे बेताल को शमशान में वास करने वाला शव अधिकारी  माना जाता है। और काली कुमाऊं बाराकोट में कुछ लोग इष्टदेवता के रूप में भी  भी मानते हैं।

यक्ष गन्धर्व योनि सम्बन्धित देवता

सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में जाख, जाखनी नाम से यक्ष यक्षिणी पूजा का प्रचलन पाया जाता है। चमोली जिले के नारायण कोटी में एक पहाड़ी के ऊपर यक्षराज का देवालय है जहां पर प्रतिवर्ष वैसाखी के अगले दिन  इस से सम्बन्धित  एक उत्सव का आयोजन भी  होता है। गढ़वाल एवम कुमाऊं क्षेत्र में घंटाकर्ण  देवता का  लोकदेवताओं में महत्त्वपूर्ण स्थान  दिया जाता है। नीति घाटी में मणिभद्र एवं यक्ष अधिपति कुबेर  देवता की विशेष मान्यता है। आंछरी,भराड़ी आदि देवियों को भी इसी वर्ग का माना जाता है।  

मानव योनि से सम्बंधित देवता 

मानव योनि से सम्बंधित  देवी-देवताओं में प्रमुख रूप से उत्तराखंड के सिद्ध कोटिक देवता जैसे कि गोरखनाथ, मछेन्द्र नाथ, त्रिलोकीनाथ, चौरंगीनाथ, चंचलनाथ, नागनाथ, भोलानाथ, गंगनाथ, मलैनाथ, खण्डनाथ, त्रिलोकीनाथ, चौरंगीनाथ, चंचलनाथ, सिद्धनाथ, बलैनाथ आदि। गढ़वाल में पूजित सिद्ध कोटिक देवताओं में प्रमुख हैं- सिद्धनाथ, सत्यनाथ, गोरखनाथ, आदि प्रमुख देवताओं को माना गया है।

                                                                                  धन्यवाद 

                                                                       A.K.Gudiyal.Uttarakhandi





Uttarakhand Gyan

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