न्याय के देवता गोलू देवता की पूजा कैसे करें?
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| गोलू देवता की पूजा कैसे करें ? |
गोलू देवता
गोलू देवता का जन्म
कहा जाता है कि गोलू देवता का जन्म चंद वंश के राजघराने में हुआ था, जो कुमाऊं क्षेत्र पर शासन करता था। गोलू देवता राजा झालूराई के पुत्र थे। उनकी माता का नाम रानी कलिंगा था, जो अपने पति राजा झालूराई के साथ राज्य में न्यायप्रिय और धर्मपरायण मानी जाती थीं। गोलू देवता के जन्म के समय कुछ ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि वे एक महान योद्धा और न्यायप्रिय राजा बनेंगे।
गोलू देवता बचपन से ही अत्यंत साहसी, बलवान और धार्मिक प्रवृत्ति के थे। उनका उद्देश्य समाज में न्याय की स्थापना करना और अत्याचारों को समाप्त करना था। वे न केवल एक योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हुए, बल्कि अपनी न्यायप्रियता के लिए भी जाने गए। माना जाता है कि वे सदैव कमजोरों की रक्षा करते थे और लोगों को न्याय दिलाते थे।
गोलू या गोरिल की मृत्यु
न्याय करने वाला देवता
अत्याचारियों
के लिए काल एवम सदाचारियों के लिए न्याय करने वाला देवता माना जाता है। इसके दरवार
में अपने कार्य की सिद्धि के लिए की
जाने वाली मनौतियों के अतिरिक्त अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध न्याय प्राप्त करने
तथा अपराधी को दण्डित किये जाने के निमित्त पुकार गुहार या दोषियों के लिए घात भी लगायी जाती है। माना जाता है
कि अन्याय तथा अत्याचार से पीड़ित व्यक्ति के द्वारा पुकार किये जाने पर भी यह उसकी
पुकार को सुनता है, चाहे पुकार करने वाला कितनी दूर से
भी पुकार करे विशेष कर असहायों व विधवाओं की पुकार तो तुरन्त सुनता है, तथा अन्याय व अत्याचार करने वाले
व्यक्ति को अनेक प्रकार के शारीरिक, मानसिक व आर्थिक संकटों में डाल कर उसे पीड़ित
व्यक्ति के साथ हो रहे अन्याय का निराकरण करने के लिए मजबूर कर डालता है।
घंटियाँ और चिट्ठियाँ चढ़ाने की परंपरा
गोलू देवता को घंटियाँ चढ़ाने की विशेष परंपरा है। मंदिर में जाकर लोग अपनी समस्या का समाधान मांगने के लिए घंटियाँ बांधते हैं। इसके साथ ही वे अपने न्याय की याचिका या प्रार्थना को लिखकर देवता के चरणों में रखते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना गोलू देवता अवश्य सुनते हैं और न्याय प्रदान करते हैं।
भक्तों के अनुभव और मान्यताएँ
गोलू देवता
के भक्त मानते हैं कि वे हर किसी की प्रार्थना का फल देते हैं। उनकी पूजा में सबसे
महत्वपूर्ण है सच्चाई, आस्था और न्याय की भावना। गोलू
देवता किसी भी जाति, धर्म या वर्ग के लोगों की
प्रार्थनाओं को सुनते हैं और उन्हें न्याय दिलाते हैं। गोलू देवता की पूजा में भक्ति और श्रद्धा का सबसे
बड़ा महत्व है। उन्हें न्याय का प्रतीक माना जाता है, और भक्तों का विश्वास है कि वे
सच्चे मन से की गई प्रार्थना का सुफल अवश्य देते हैं।
गोलू देवता का पूजा विधान
गोलू देवता की पूजा करने के लिए सबसे प्रमुख स्थान उनका मंदिर है। जो उत्तराखंड के चितई, घोडाखाल एवं विनसर में स्थित है। गोलू देवता के अन्य मंदिर भी कुमाऊं क्षेत्र में कई स्थानों पर मिलते हैं। मंदिर या घर में पूजा के लिए विधि विधान का पालन इस तरह से किया जाता है।इसके अलावा मन्दिर में घंटिया बांधना ,चिट्ठी लिखकर चड़ाना,धुप दीपक,
मंदिर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं को स्नान करके शुद्ध मन और शरीर से ही पूजा करनी चाहिए।गोलू देवता के मंदिरों में घंटियाँ चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए घंटियाँ बांधते हैं। जब उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, तो वे धन्यवाद स्वरूप एक और घंटी चढ़ाते हैं। इन घंटियों को मंदिर के मुख्य द्वार या आंगन में बांधा जाता है।
धूप और दीपक
पूजा के दौरान धूप,अगरबत्ती और दीपक जलाया जाता है। दीपक जलाना गोलू देवता के प्रति आस्था और भक्ति का प्रतीक होता है। अगर आप गोलू देवता की पूजा घर पर करना चाहते हैं, तो आप दिए गए सरल विधि का पालन कर सकते हैं घर में एक साफ और पवित्र स्थान पर गोलू देवता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। पूजा करने से पहले स्नान करके शुद्ध होना आवश्यक है। पूजा स्थल को भी स्वच्छ रखें। गोलू देवता की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और धूप दिखाएं। गोलू देवता को गुड़, मिठाई या अन्य साधारण प्रसाद अर्पित करें। पूजा में विशेष खाद्य सामग्री का महत्त्व नहीं है, क्योंकि सच्ची भक्ति में श्रद्धा और शक्ति है।
मंत्र उच्चारण
गोलू देवता का कोई विशेष मंत्र नहीं है, लेकिन आप साधारण शिव मंत्र या कृष्ण मन्त्र से भक्ति मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं, क्योंकि गोलू देवता को शिव का अवतार माना जाता है, और इसे दूधाधारी कृष्ण अवतारी भी माना जाता है।
प्रसाद अर्पण
भक्त गोलू देवता को प्रसाद के रूप में गुड़, मिठाई, नारियल और अन्य शुद्ध खाद्य सामग्री अर्पित करते हैं। प्रसाद चढ़ाने के बाद इसे भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।
प्रार्थना या याचना
पूजा के बाद गोलू देवता के सामने अपनी समस्या या मनोकामना प्रकट करें। आप यह मौखिक रूप से कर सकते हैं या एक पत्र में लिखकर उनके चरणों में रख सकते हैं ,गोलू देवता को न्यायप्रिय देवता माना जाता है, इसलिए यदि कोई अन्याय या समस्या है तो उससे संबंधित अपनी प्रार्थना को उनसे निवेदन करें।
